गांधी जयन्ती – 2 अक्टूबर

 महान् व्यक्तियों का जन्मदिन ही उनकी जयन्ती कहलाता है। यथा-25 मई बुद्ध जयन्ती, 13 अप्रैल महावीर जयन्ती, 14 अप्रैल अम्बेडकर जयन्ती व 2 अक्टूबर गांधी जयन्ती इत्यादि। महान् व्यक्तियों की जयन्ती बहुत धूमधाम से मनायी जाती है। इसके पीछे यह उद्देश्य होता है कि उनके महान् कार्य एवं गुणो को जन-जन तक पहुचांया जाये। इसके लिए सभा और गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। इनमें सभी श्रद्धालु वक्ता उस महापुरूष के बारे में अपने-अपने विचार व्यक्त करते हैं। साथ ही समकालीन लोग अपने संस्मरण भी सुनाते हैं। इस प्रकार जयन्ती के माध्यम से हम उन महापुरूषों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते है उनकी स्मृति को ताजा करते हैं।
2 अक्टूबर गांधीजी का जन्मदिन है। इस दिन गांधी जयन्ती मनायी जाती है इस दिन शिक्षण-संस्थाआंे एवं सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक छुट्टी रहती है। छात्रों द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं। गांव एवं शहर के मुहल्लों की सफाई की जाती है (विशेष रूप से हरिजन-क्षेत्रों की) तथा दरिद्र नारायण के बीच भोजन तथा वस्त्र बांटे जाते हैं। चरखा पर सूत काते जाते है तथा भजन गाये जाते हैं।विगत 2 अक्टूबर को हमारे स्थानीय पुस्तकालय परिसर में गांधी जयन्ती का आयोजन किया गया था। आयोजन में उपस्थित लोगों के बीच सर्वप्रथम अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि द्वारा उस चित्र पर माल्यार्पण किया गया, जो गांधी जयन्ती के अवसर पर मंच पर रखा गया था। उसके बाद अन्य श्रद्धालुआंे द्वारा भी बारी-बारी से पुष्पांजलि अर्पित की गयी। स्थानीय कलाकारों द्वारा गांधीजी के दो प्रिय भजन-’ईश्वर अल्ला तेरे नाम’ और ’वैष्ण जन तो तेणे कहिये पीर परायी जाणे रे’ गाये गये। इन भजनों पर सभी श्रोता मुग्ध हो गये। इसके बाद सभी वक्ताओं ने गांधीजी के बारे में अपने-अपने विचारों को प्रभावकारी ढंग से रखा। एक वक्ता ने कहा-’’जिस क्षण हमारे मन में शुभ विचारों का उदय हो, उसी क्षण गांधीजी का जन्मदिन समझना चाहिए।’’
        मुख्य अतिथि द्वारा गांधीजी के कार्यों एवं गुणों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा-’’सत्य ही गांधी का ईश्वर था और अहिंसा उसको पाने का उपाय।’’ आज इस हिंसा और अशान्ति से तप्त विश्व में गांधीवाद के सहारे ही शान्ति लायी जा सकती है। गांधीवाद की बुनियाद पर ही दक्षिण अफ्रीका को आजादी मिली। उसके नेता नेल्सन मण्डेला का कहना है-’’जब-जब मुझमें आत्मबल की कमी महसूस होती है, तब-तब मैं दिल्ली स्थित बापू की समाधि के समीप बैठकर पुनः इसे प्राप्त कर लेता हूं।’’ इस प्रकार गांधीजी सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं।
        आज हमारे देश में सर्वत्र अराजकता है। भाई-भाई एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गये हैं। आतंकवादी और अलगाववादी शक्तियां देश को खण्डित करने पर तुली हैं। ऐसे में जगह-जगह गांधी जयन्ती मनाकर जनमानस के बीच गांधीवाद का प्रचार कर जन समस्याओं से मुक्ति पायी जा सकती है।