सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट मेरा प्रिय खेल है। इस खेल के प्रति मेरी रुचि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक अच्छे क्रिकेट मैच को देखने के लिए मैं कई मील तक पैदल चलकर जा सकता हैं। यह मैच उस समय मेरे लिए और भी लोमहर्षक और सम्मोहक हो जाता है, जब सचिन तेंदुलकर उसमें एक खिलाडी के रूप में उपस्थित हों। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं ऐसा प्रत्येक मैच देखें, जिसमें सचिन एक नायक के रूप में खेल रहे हों। खिलाड़ी के रूप में खेलते हुए सचिन की गतिविधियों को सनने मात्र से मेरे मन को पर्ण। संतुष्टि नहीं प्राप्त हो पाती, इसलिए मैं उन्हें खेलते हुए दूरदर्शन पर या स्टेडियम में स्वयं उपस्थित होकर देखता हूँ।
क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल, 1973 को हुआ था। मात्र सोलह वर्ष की आयु में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और समय के साथ-साथ अपनी कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास से उन्होंने अपने आपको एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। उनकी बल्लेबाजी का जादू दर्शकों को अनायास ही अपनी ओर खींचने में समर्थ है। उनका स्ट्रोक क्रिकेट की बेहतरीन तकनीकों और युक्तियों का संयोग होता है । वह किसी भी चुनौती का कहीं भी और किसी भी समय सामना करने के तैयार रहते हैं अपनी महत्त्वाकांक्षा और खेल से संबंधित अपने असाधारण गुणों के कारण उन्हें चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पसंद है मैच के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने प्रदर्शन को संतुलित और लचीला बनाए रखना उनका एक प्रमुख गुण है। क्रिकेट की दुनिया में सचिन भारत की एक अमूल्य निधि हैं।
उनकी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए, उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मेरे जैसे सचिन के हजारों प्रशंसकों के लिए यह अवसर बहुत ही आनंददायक था। सचिन आज भी अपने-आपको एक विद्यार्थी के रूप में ही देखते हैं, और हर पल सीखने को तत्पर रहते हैं।
आज भी उन्होंने अपने नियमित अभ्यास में कोई कमी नहीं आने दी है। उनकी उपलब्धियों और महत्त्वाकांक्षाओं को देखते हुए उन्हें क्रिकेट की दुनिया का ‘वण्डर बॉय’ कहा जाता है। वास्तव में, ऐसे गुणसंपन्न और महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति को सम्मानित करने में हमारा स्वयं का सम्मान है। क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर ने देश के नवोदित क्रिकेट खिलाड़ियों के समक्ष एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है उनका साहस, धैर्य, विनम्रता और टीम भावना आदि उनके ऐसे गुण हैं, जिन्हें देखकर उनके विरोधी भी मुक्तकंठ से उनकी प्रशंसा करते है। तेंदुलकर के रूप में देश को एक बहुमूल्य भूषण देने के लिए हमें उनके कोच एवं क्रिकेट गुरु श्री रमाकांत आचरेकर को आभार एवं हार्दिक बधाई देनी चाहिए।