भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी

प्रस्तावना : स्वतन्त्रता प्रप्ति के पश्चात् भारत ने पर्याप्त उन्नति की, हमारी पंचवर्षीय योजनाओं ने भारत के विकास में पर्याप्त योगदान दिया और विकास के लिए जितनी पूँजी और प्रयत्नों को लगाया गया उसके अनुपात में विकास की मात्रा बहुत ही कम है। विचार करने पर मालूम होता है कि इसके प्रधान कारण भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी हैं। रिश्वत, सिफ़ारिश, कालाबाजार आदि सब इन्हीं के विभिन्न रूप हैं। आज समाज के प्रत्येक क्षेत्र में इनके दर्शन हो रहे हैं। हम प्रात:काल नित्य प्रति जब आकाशवाणी (रेडियो) से ‘सत्यमेव जयते’ की ध्वनि सुनते हैं, तो हमें गौरव होता है कि हमारे भारत में कभी सत्य की ही विजय होती थी; उसी का इतना महत्त्व था, किन्तु आज इस भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी के युग में सत्य हमसे बहुत दूर भाग गया है, इसीलिए समाज के प्रत्येक क्षेत्र में अशान्ति है ।
विश्व में जगद्गुरु कहलाने वाले इस भारत की हीन दशा को देखकर आज भारतेन्दु जी के साथ ही हम आदर्श भारतीयों का हृदय रो उठता है -“हा हा, भारत दुर्दशा न देखी जाई।” अर्थ की व्याख्या : भ्रष्टाचार शब्द भ्रष्ट्र + आचार शब्दों से मिलकर बन है। ‘भ्रष्ट’ शब्द का अर्थ प्रायः निकृष्ट कोटि की विचारधारा के लिये किया गया है। ‘आचार’ का अर्थ आचरण है। दूसरे शब्दों में भ्रष्टाचार से तात्पर्य उस निन्दनीय आचरण से है, जिसके वश में होकर व्यक्ति अपने कर्तव्य को भूलकर अनुचित रूप से लाभ प्राप्त करता है। भ्रष्टाचार के विषय में कुछ विद्वानों का कथन है कि यह एक ऐसा वृक्ष हैं जिसकी जड़े ऊपर की ओर और शाखाएँ नीचे को ओर हैं। स्वामी रामतीर्थ ने एक बार कहा था कि भ्रष्टाचार जब समाज में प्रारम्भ हो जाता है, तब वह समाज ऊपर से क्रियाशील प्रतीत होते हुए भी अन्दर से खोखला होता है।
यह भ्रष्टाचार की विषाक्त बेल आज बड़े जोरों से फैल रही है । आदरणीय स्व० श्री गुलजारी लाल नन्दा जी ने विष को रोकने हेतु इन्जेक्शन तैयार करना चाहा था; र सफलता नहीं मिली । क्या करें यह विष ही ऐसा है। जिससे विररता ही बचा होगा । इस भ्रष्ट भावना के कारण ही व्यक्ति, व्यक्ति का खून चूस रहा है । इसी भावना के कारण आज बाजार की प्रत्येक वस्तु में मिलावट है । ‘आज गर्ममसाला लीद भरा’ गाया जाने वाला गीत बिल्कुल यथार्थ है। गर्ममसाला ही क्या जीरे में सींक के भूसे की मिलावट, काली मिर्च में काले गोल छोटे पत्थरों की मिलावट, देशी घी में डालडा व चर्बी की मिलावट, किस-किस चीज़ के दुखड़े को रोया जाये । बाजार की प्रत्येक वस्तु मिलावट से पूर्ण है। आज की जमाखोरी की धारणा व्यक्ति को अब भी शान्त नहीं बैठने देती है, व्यक्ति निन्यानवे के चक्कर में है और मिश्रित वस्तुओं में मिश्रण की ओर भी अधिक मात्रा बढ़ाई जा रही है।
भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी के मूल कारण : भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी के कारण इन प्रवृत्तियों को अपनाने वाले स्वयं भी परेशान रहते हैं; किन्तु इस रोग का उपचार बड़ा कठिन है । इन रोगों को दूर करने के लिए इनके मूल पर प्रहार करना चाहिए । इन दुष्ट प्रवृत्तियों के जन्म के निम्नलिखित कारण हैं ।
जनसंख्या वृद्धि : स्वामी रामतीर्थ के विचार कुछ समय पूर्व से आ रहे हैं कि जब किसी देश में जनसंख्या इतनी ८ढ़ जाती है कि आवश्यकतानुसार सभी को सामग्री नहीं प्राप्त होती, तब देश में भ्रष्टाचार का जन्म होता है । स्वामी जी के उक्त कथन में बहुत कुछ। सत्यता है । जनसंख्या के अनुपात में जीविका के उप र्जनों के साधनों की कमी के कारण आज समाज में भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी का बोलबाला है ।
भौतिकता की वृद्धि : आज के इस भौतिकतावादी वैज्ञानिक युग में प्रत्येक व्यक्ति भौतिक साधनों के संग्रह में आँख मीचकर जुटा हुआ है। चाहे उसे कितने ही भ्रष्ट तरीकों का उपयो । क्यों न करना चाहता है । पड़े, वह मिलावट आदि प्रत्येक साधन के द्वारा धन का संग्रह करना |
स्वार्थ वृद्धि : आजकल लोगों में विश्वबन्धुत्व की भावना नहीं। है । पड़ोसी-पड़ोसी का ध्यान नहीं देता । चाहे पड़ोसी के घर आग ही क्यूँ न लग जाये, व्यक्ति अहर्निश अपने साधनों की सिद्धि में ही लगा रहता है
सरकार की ढीली राजनीति : हमारे देश में राजनीति में गाम्भीर्य नहीं है। हमारे यहाँ के नेतागण अपनी विजय के हेतु पर्याप्त नोटों का व्यय करके भ्रष्ट तरीकों से जनता का मत रखरीद कर विजय प्राप्त करते हैं, फिर चुनाव में खर्च किए गए धन की पूर्ति भी भ्रष्ट तरीकों से ही घूस आदि के द्वारा करते हैं ।
शिक्षा का प्रभाव : आजकल प्रत्येक मानव शिक्षित नहीं है। उसको यह ज्ञान नहीं है कि किस कार्य को किस विधि से किया जाये जिससे सफलता प्राप्त हो । जिन लोगों को शिक्षा दी भी जाती है। उनको नैतिकता एवं आदर्शों से पूर्ण शिक्षा नहीं दी जाती है और न ही उनको सन्तोष का पाठ पढ़ाया जाता है ।
फैशन : आजकल फैशन के नये-नये साधनों की उपलब्धि हेत। भ्रष्ट तरीकों को अपना कर धनोपार्जन करने की प्रथा बढ़ रही है । आज विशेष रूप से स्त्रियों की मर्यादा एवं शील का स्थान अंग-प्रदर्शन के फैशन ने ले लिया है । घर में भोजन भले न जुड़े; परन्तु फैशन की भरपूर सामग्री होनी चाहिये, भले ही शुद्ध चीजों में नकली चीजों को मिलाकर बेचना पड़े और यहाँ चाहे शरीर के उपयोग के द्वारा भी धन एकत्रित करना पड़ेगा, तो करेंगी ।
झूठी मान मर्यादा : कुछ लोग झूठी शान में समाज से अपना उच्च स्थान मानकर अच्छे वस्त्र पहनते हैं । क्षण-क्षण पर होटलों की शरण लेते हैं, चाहे उनकी आय कम ही क्यों न हो । इन सभी की पूर्ति हेतु उन्हें भ्रष्ट विधियों को विवश होकर अपनाना पड़ता है । वह इस बात को बिल्कुल ही भूल जाते हैं कि “तेते पाँव पसारिये जेती लम्बी सौर ।”
महँगाई : आजकल कमरतोड़ महँगाई अपना प्रभाव समस्त समाज पर जमाये हुए है। आज के युग में मानव अपने वेतन में से भरपेट भोजन भी नहीं कर सकता, फिर औषधि, वस्त्र और मकान आदि के बढ़े हुए मूल्यों का सामना वह किस प्रकार करे ? परिणामत : वह भ्रष्ट साधनों को अपना कर अपनी जीविका चलाता है तथा भविष्य के लिए कुछ जमा करने की भी चेष्टा करता है ।
सामाजिक कुरीतियाँ : बड़े-बड़े भोज एवं दहेज प्रथा आदि समाज में कुछ ऐसी कुरीतियाँ प्रचलित हैं जिनकी पूर्ति हेतु व्यक्ति को बाध्य होकर भ्रष्ट तरीकों से धन-संग्रह करना पड़ता है ।भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी से हानियाँ : भ्रष्टाचार, मिलावट एवं जमाखोरी की प्रवृत्तियाँ देश की उन्नति में बाधक हैं । समस्त देश की उन्नति इन दुष्प्रवृतियों का शिकार बनती हैं। इन दुष्प्रवृतियों से अनेक हानियाँ हैं-
(1) राष्ट्रीय सम्पत्ति की क्षति – भ्रष्ट व्यक्ति देश के लिए आवश्यक इमारतें, पुल और बाँध आदि के निर्माण में भ्रष्ट तरीकों को अपनाते हैं । सीमेंट में अधिक रेत मिलाया। जाता है जिससे कि इमारतें शीघ्र ही समाप्त हो जाती हैं । भाखड़ा नांगल बाँध में दरार पड़ने का यही कारण था ।
(2) कार्य में विलम्ब- प्राय- प्रत्येक कार्यालय में क्लर्क आदि उत्कोच प्राप्त करने के लिये व्यर्थ ही कार्य में विलम्ब करते हैं ।
(3) योग्य जनों का अनुपयोग- भ्रष्टाचार के कारण योग्य व्यक्तियों को उचित स्थान न मिल पाने के कारण उनकी बुद्धि का दुरुपयोग होता है जिससे वह विवश होकर जीवनयापन के लिए भ्रष्ट तरीकों को अपनाते हैं ।
(4) जीवन के साथ खिलवाड- भ्रष्टाचारी, मिलावट, एवं जमाखोरी करने वाले व्यक्ति खाद्य एवं औषधियों में मिलावट करके सम्पुर्ण जनता को धोखा देकर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं ।
(5) वस्तुओं की न्यूनता- प्रायः भ्रष्टाचारी, मिलावट एवं जमाखोरी करने वाला व्यक्ति वस्तुओं का कृत्रिम अभाव प्रदर्शित कर साधारण जनता को ठगते हैं तथा उनके जीवन को कष्टसाध्य बनाते हैं ।