भारत का परमाणु विस्फोट

प्रस्तावना : ‘सृजन और विनाश’ प्रकृति नदी के हमेशा  चलने वाले दो चक्र हैं। न्याय दर्शन के अन्तर्गत बतलाया गया है कि जाली के अन्तर्गत दिखाई पड़ने वाले छोटे-छोटे कण ही अणु होते हैं। एक अणु का साठवाँ भाग परमाणु कहलाता है। ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि ज़िनको अक्षुवीक्षण यन्त्र के द्वारा भी नहीं देखा जा सकता। एक सूई की नोंक में करोड़ों परमाणु होते हैं।
सबसे पहले इंग्लैंड के एक महान् वैज्ञानिक ‘आइन्स्टीन’ ने सन् 1919 में परमाणुओं के अवयवों को अलग किया था। जर्मन वैज्ञानिक सन् 1938 से अणु बम बनाने के लिये प्रयत्नशील थे, परन्तु 1945 ई० तक नहीं बना सके। श्री आइन्स्टीन ने अमरीकी अध्यक्ष रूजवेल्ट को 1939 में लिखा था कि अणुबम बन सकता है और जर्मन लोग उसकी कोशिश कर रहे हैं; लेकिन अमरीकी वैज्ञानिक फर्जी शिकागो 1945 ई० में पूर्णत: अणु बम का प्रथम विस्फोट कर सके। सोवियत संघ को अमेरिका के साथ पहँचने में चार साल लगे और फ्रांस 1960 ई० में अणु बम विस्फोट कर सका। संसार में विज्ञान की इतनी प्रगति होने के बाद भी चीन 16 अक्तूबर 1964 ई० में अपना प्रथम विस्फोट कर सका। इसलिये स्पष्ट है कि परमाणु विस्फोट के निर्णय के बाद भी विस्फोट में। पर्याप्त समय लगता है।
भारत में अणु विस्फोट की योजना : भूतपूर्व रक्षामंत्री श्री जगजीवन राम ने बतलाया था कि अणु विस्फोट का निर्माण भारत सरकार ने 1971 ई० में किया था। राजस्थान में पोकरण के समीप जिस जगह विस्फोट हुआ है, उसको खरीद लिया गया था और किसानों को उसका मुआवजा देकर उसे निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया गया था। संसद और उनकी सलाहकार समिति बार-बार यह वक्तव्य दे रही थी कि अणु शक्ति आयोग अणु के शान्तिपूर्ण प्रयोग का अध्ययन कर रहा है; किन्तु अध्ययन की कोई पक्की जानकारी नहीं दी गई थी। कुछ समय पहले संकेत मिले थे कि अणु शक्ति विभाग राजस्थान और बिहार में भू-गर्भीय परीक्षण करने के प्रयास में है।
राजस्थान के रेगिस्तानी स्थान पोकरण के पास 18 मई सन् 1974 को प्रात: 8.05 पर भारती ने 100 मीटर से भी अधिक भू के अन्दर विस्फोट करके संसार के हृदय में विस्फोट कर दिया।
आणविक विस्फोट के इस सफल अणु परीक्षण की सूचना अणु शक्ति आयोग ने सर्वप्रथम भूतपूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी को, जो अणु-शक्ति मामलों की मन्त्री भी थीं दी, वह उस समय मंत्रिमण्डल की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में भाग ले रही थीं। उन्होंने तत्काल पहले तो इस समिति को और बाद में पूरे मंत्रि-मण्डल को देश की ऐतिहासिक उपलब्धि से अवगत कराया। शान्तिपूर्ण अणु विस्फोट की सूचना भारतीय अणु शक्ति आयोग ने । बिना किसी विवरण के 1 बजे दोपहर को जारी की। इसके निर्माता डॉ० सेठना तथा डॉ० रमन्ना थे। भारत ने आज जिस अणु आविष्कार का विस्फोट किया, वह आकार में उस अणु बम से छोटा था जो 1944 ई० में हीरोशिमा पर गिराया गया था। हीरोशिमा वाले बम का आकार करीब 20 किलो टन था । यही आकार चीन के बम का भी। था जिसका उसने पहले-पहल विस्फोट 1964 ई० में किया था। भारतीय अणु का आकार 10 किलो और 15 किलो टन के बीच में है।
अणु विस्फोट पर व्यय : आणविक ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ० एच० एन० सेठना ने 31 मई 1974 को अपने एक टेलीविजन साक्षात्कार में बतलाया था कि भारत ने पिछली 27 मई को जो प्लूटोनियम से निर्मित आणविक परीक्षण किया उसकी लागत 4,00,000 अमेरिकी डालर (लगभग 30 लाख रुपया) आई है। उन्होंने कहा कि यह धनराशि देश में आणविक ऊर्जा परीक्षणों पर होने वाले व्यय का एक बहुत छोटा भाग है।
एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने दावा किया है कि विश्व का छठा परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाने के लिये भारत को 9 करोड़ पौण्ड (लगभग 162 करोड़ रुपये ) व्यय करने पड़े हैं। भतपर्व विदेश मन्त्री सरदार स्वर्णसिंह ने जेनेवा में कहा था कि भारत में इस अणु विस्फोट से देश की आर्थिक स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं आया है।
सफल अणु विस्फोट से सम्पूर्ण देश रोमांचित : भारत के सफल आणविक प्रयोग से सम्पूर्ण देश रोमांचित हो उठा और सर्वत्र भारतीय वैज्ञानिकों को इस महान् सफलता के लिए उत्साहपूर्ण बधाइयाँ दी गईं। तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने सफल आणविक विस्फोट पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में यह महत्त्वपूर्ण कदम है। जनसंघ के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि इस विस्फोट के लिए मैं परमाणु शोध कार्य में लगे भारतीय वैज्ञानिकों की भूरि-भूरि प्रशंसा करना चाहती हूँ। चौ० चरणसिंह ने भारतीय वैज्ञानिकों और सरकार को बधाई देते हुए कहा था कि आणविक विस्फोट काफी पहले होना चाहिए था। सोशलिस्ट पार्टी के महामन्त्री श्री सुरेन्द्र मोहन ने कहा था कि भारतीय वैज्ञानिकों को उनके इस कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई । उत्तर प्रदेश किसान मजदूर के प्रान्तीय संयोजक श्री मायापति त्रिपाठी ने भारतीय वैज्ञानिकों तथा परमाणु-शक्ति की। मन्त्री श्रीमती इंदिरा गाँधी को बधाई दी। अणुशक्ति आयोग के अनुसार डॉ० सेठना तथा भाभा अणुशक्ति अनुसंधान केन्द्रों के संचालक .डॉ० रमन्ना का बम्बई महानगरपालिका ने नागरिक अभिनन्दन करने
का निर्णय किया । श्री बहुगुणा ने इस शानदार सफलता के लिये भूतपूर्व प्रधानमन्त्री को बधाई दी।
विदेशों में प्रतिक्रियाएँ : भारत के अणु विस्फोट की घटना। सुनते ही अधिकतर देशों को यह अच्छा न लगा और वह इस अणु-विस्फोट की आलोचना मनमाने ढंग से करने लगे। जेनेवा निशस्त्रीकरण सम्मेलन में हालैण्ड, नाइजीरिया और ब्रिटिश के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने ढंग से भारत के परमाणु विस्फोट पर नाराजगी प्रकट की। परमाणु विस्फोट के विरोध में कनाडा ने अणु क्षेत्र में भारत को प्रत्येक प्रकार का सहयोग देना बन्द कर दिया। वाशिंगटन इवनिंग स्टार न्यूज ने लिखा कि भारत का परमाणु विस्फोट कोई खुश करने वाली खबर नहीं है। अमेरिका के अधिकारियों ने इस बात की आशंका अभिव्यक्त की कि भारत के परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनने से भारत की अपेक्षा सोवियत रूस कहीं अधिक लाभान्वित होगा। इसी के प्रति स्वरूप तत्कालीन अमेरिकी रक्षामन्त्री श्री जेम्स शेलेसिंनार ने पत्रकारों के समक्ष यह घोषणा की कि अगर भारत खुद अपने आणविक हथियार बनाता है, तो अमेरिका भारत को आणविक सुरक्षा प्रदान करने का अपना वायदा समाप्त कर सकता है। न्यूयार्क टाइम्स ने बड़े राष्ट्रों का आह्वान किया कि वे भारत और अन्य देशों को अणु विस्फोट के सम्बन्ध में निरुत्साहित करें। भारत के विस्फोट से सबसे अधिक द्वेष पाकिस्तान को हुआ है। पाकिस्तान ने सेटो की बैठक में आरोप लगाया है कि भारत का परमाणु विस्फोट दक्षिणी एशिया के लिए खतरा है। इसने हिन्द महासागर सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र संघीय समिति की बैठक में भी यह शिकायत की कि अणु विस्फोट के बाद अब भारत परमाणु शस्त्रों की प्रक्षेपण प्रणाली तैयार कर रहा है। इसी के प्रतिफल स्वरूप पाकिस्तान अपने परमाणु कार्यक्रम पर नये सिर से  विचार कर रहा है। जेनेवा सम्मेलन में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश सचिव श्री आगाशाही ने सम्मेलन में बोलते हुए आरोप लगाया कि भारत के परमाणु विस्फोट में नयी स्थिति पैदा हो गई है। स्व० श्रीमती इंदिरा गाँधी ने कहा था कि हमारे शान्तिपूर्ण विस्फोट से कोई नयी स्थिति पैदा नहीं हुई है। इससे पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है।
हमारे अणु विस्फोट पर सेगेनल के राष्ट्रपति से धो ने इस बात पर सन्तोष व्यक्त किया कि भारत ने शान्तिपूर्ण कार्यों के लिए अणु विस्फोट किया है।
कुछ भी हो कोई हमारी निन्दा या प्रशंसा करे । भारत को इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
अत: भारत को अडिग होकर परमाणु शक्ति और परमाण तकनीक के विकास के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिस्पर्धा, प्रतिद्वन्द्विता और शत्रुता के आधार पर जो लोग भारत का विरोध कर रहे हैं, वे भारत की सफलता से कुण्ठित हो गए हैं।
परमाणु शक्ति का शान्तिमय उपयोग : शान्तिमय उपयोग से परमाणु विघटन की शक्ति से बिना ईंधन के विद्युत् गृह निरन्तर चलाए जा सकते हैं। यूरेनियम के प्रयोग से मोटरगाड़ी, जलयान एवं वायुयान चलाए जा सकते हैं। परमाणु द्वारा अतिवृष्टि बादलों को छिन्न-भिन्न करके रोका जा सकता है। विस्फोट द्वारा कृत्रिम वर्षा भी करायी जा सकती है। अत: परमाणु शक्ति असीम शक्ति है जिसके द्वारा मनुष्य आशातीत उन्नति कर सकता है।
विगत दिवसों में हुए भारतीय अणु विस्फोट के विषय में भूतपूर्व विदेशमंत्री श्री सरदार स्वर्णसिंह ने जर्मन टेलीविजन को दिए गये एक इण्टरव्यू में यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत व पाकिस्तान में परमाणु अस्त्रों’ की कोई होड नहीं है। हम परमाणु शक्ति का शान्तिमय उपयोग करेंगे। अणु निर्माता डॉ० सेठना ने कहा कि आणविक हथियार रखना ज्वालामुखी के मुंह पर बैठना है और जहाँ कहीं भी ऐसा हो रहा है वह निहायत बेहूदापन है। हमारी भूतपूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने संसार के समक्ष यह स्पष्ट घोषणा की थी कि हमारी परमाणु शक्ति के विकास से किसी को कोई भय नहीं होना चाहिए क्योंकि हम इस शक्ति का उपयोग सदैव शान्तिमय रूप से देश के विकास के कार्यों ही में करेंगे।
परमाणु शक्ति का युद्ध के लिए उपयोग : परमाणु शक्ति का प्रथम आभास द्वितीय विश्व युद्ध के समय हुआ। सर्वप्रथम अमेरिका ने जापान के दो नगरों हीरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए, दोनों नगर भस्मीभूत हो गए।  सम्पूर्ण विश्व इसके भयंकर परिणामों को देखकर दहल गया। हजारों व्यक्ति आँखें खो बैठे।
परमाणु शक्ति के विकास से लाभ : परमाणु शक्ति से अपार लाभ हैं, जिनमें प्रमुख ये हैं :
(1) ईंधन के अभाव के भय से मुक्ति: परमाणु शक्ति के प्रयोग से ईंधन का महत्त्व ही समाप्त हो जायेगा।
 (2) विद्युत् शक्ति का उत्पादन – इससे निरन्तर उपयोग हेतु पर्याप्त बिजली प्राप्त होगी ।
(3) परमाणु शक्ति से जहाज, मोटरगाड़ियाँ चलने लगेगी।
(4) गुजरात में अणु विस्फोट से तेल निकलने से भारत की चाँदी ही चाँदी है।
(5) चिकित्सा के क्षेत्र में भी यह महान् उपयोगी होगा, इससे कैंसर आदि असाध्य रोग भी आइसोटोपों द्वारा ठीक हो जायेंगे।
उदजन बम का निर्माण : भारतीय अणुशक्ति आयोग के अध्यक्ष डॉ०एच० एन० सठना तथा भाभा अनुसंधान केंद्र के निदेव डॉ० रमन्ना ने ब्रिटिश पत्र गार्जियन के संवाददाता को बताया है कि भारत का अणु विस्फोट कार्यक्रम आगे चलकर उद्जन बम विस्फोट के कार्यक्रम का रूप ले लेगा।
उपसंहारं : फ्रांस, चीन, रूस, अमेरिका, इंग्लैंड और भारत आदि देश विस्फोट कर चुके हैं यदि उनका शान्तिमय उपयोग न किया गया, तो संसार का कोई भी क्षेत्र खतरे से रिक्त नहीं है। आज प्रत्येक मानव जीवित होते हुए भी परमाणु के संहारक रूप को देखकर अपने को सर्वदा काल के गाल में समझता है। अत: आज के युग की यह माँग है कि संहारकारी कार्यों के लिए अणु विस्फोट को एकदम रोक दिया जाये। यदि ऐसा न हुआ तो धरा पर मानव मात्र का अवशेष भी दृष्टिगोचर नहीं होगा। हमारे भारत का दृष्टिकोण सर्वदा शान्तिमय है, जैसा कि डॉ० रमन्ना ने अभिव्यक्त किया था कि हम लोग परमाणु शक्ति के शान्तिमय उपयोग की दिशा में कार्यरत हैं। अत: यदि सभी देश अपना यही दृष्टिकोण अपनाकर अणुशक्ति का उपयोग मानव मात्र के कल्याण के लिए करें, तो मानव के लिए अपूर्व वरदान सिद्ध होगा और भारतीय मनीषा की, “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः” की कल्पना साकार हो उठेगी।