कम्प्यूटर के बढ़ते चरण

प्रस्तावना : आधुनिक ज्ञान-विज्ञान ने आज के मानव-समाज को दैनिक उपयोग में आ सकने वाले कई तरह के महत्त्वपूर्ण आविष्कार प्रदान किए है कहा जा सकता है कि कम्प्यूटर उनमें से अभी तक का अन्तिम बहुआयामी एवं बहुपयोगी आविष्कार है। इसने आज के व्यस्त-त्रस्त मानव को कई प्रकार की सुविधाएँ-सरलताएँ प्रदान की है। पहले के मानव को जिन अनेक कार्यों को करने के लिए घण्टों माथापच्ची करनी पड़ती थी, कम्प्यूटर की सहायता से अब वह आरम्भ करते ही सम्पन्न भी हो जाया करते है।इससे मानव के बहुत सारे श्रम, समय और शक्ति की बचत हो सकी है। जिनका उपयोग वह कई अन्य तरह के उत्पादक कार्यों में कर सकता है।
विज्ञान की महत्त्वपूर्ण देन : उपयोगिता एवं उपलब्धियों की दृष्टि से कम्प्यूटर आज के विज्ञान की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण देन है।  यह बात, हम ऊपर भी कह आए है। ध्यान रहे विज्ञान की पहुँच वही और उन्हीं पदार्थों-तत्त्वों तक है  या हो सकती है  कि जिन्हें सहज ही छुआ या फिर नापा-तोला जा सकता है। सो विशेष कर नापने, आँकड़े इकट्ठे करके उनके सुख-दु:खद परिणाम झटपट बना देने के क्षेत्र में आज इस आविष्कार ने सचमुच क्रान्ति ला दी है। इसकी सहायता से आज तत्काल ही यहाँ-वहाँ की स्थितियों की जानकारी एक साथ प्राप्त करके, एक साथ कई कार्य किये जा सकते है।इसका महत्त्व स्पष्ट करने के लिए हम यहाँ एक उदाहरण देना चाहेंगेरेलवे निकट आरक्षित कराने के लिए पहले यात्री को, तो घंटों लाइन में लगना पड़ता थाटिकट बाबू को भी कई रजिस्टर खोलने बन्द करने पड़ते थे, तब कहीं जाकर सही स्थिति का पता चल पाता थाआज मात्र बटन दबाने से यात्रा आरम्भ करने वाले और गंतव्य स्थान की स्थिति का समुचित ज्ञान हो जाता है। पहले रजिस्टर खोलने बन्द करने के अन्तर में टिकट बाबू लाभ कमाने की इच्छा से हेरा-फेरी भी कर लिया करता था, आज उसकी भी गुंजाइश नहीं रह गईएक ही स्थान से जाने-आने दोनों की बुकिंग की सुविधा हो गई है। इस प्रकार की सुविधाएँ अन्य क्षेत्रों में भी प्रदान करके कम्प्यूटर ने संभव भ्रष्टाचार पर भी प्रहार किया है। इसी कारण इसे महत्त्वपूर्ण देन माना और स्वीकारा गया है।
बढ़ता प्रचलन : सरकारी-गैरसरकारी सभी क्षेत्रों में आज कम्प्यूटर का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। ; क्योंकि एक तो वह अकेला कई आदमियों का काम कर सकता है। , दूसरे अत्यन्त साफ़-सुथरे और प्राय: एकदम सही ढंग से कर पाने में समर्थ है। , उसके बढ़ते प्रचलन या निरन्तर बढ़ते कदमों का यह एक महत्त्वपूर्ण कारण है। आज जिस किसी भी विभाग में बिल बनाने का कार्य हुआ करता है। , उसका कम्प्यूटरीकरण या तो हो चुका है।  या फिर निरन्तर हो रहा है। रेलवे की तरह डाक तार और विद्युत् प्रदाय आदि विभागों में भी इससे कार्य लिया जाने लगा है। इससे काम के अनुशासन और गति की तीव्रता में अभूतपूर्व वृद्धि सम्भव हो सकी है। , ऐसा सभी का स्पष्ट मत है।  
सुविधाएँ और लाभ : कम्प्यूटर के अनवरत बढ़ते और विस्तृत होते कदमों से प्राप्त हो सकने वाली सुविधाओं और कई लाभों की ओर ऊपर स्पष्ट संकेत किया जा चुका है। उनके अतिरिक्त आज अन्य कई प्रकार के कार्य भी सुविधापूर्ण ढंग से इस के द्वारा किए जाने लगे है।आज कम्प्यूटरीकृत कम्पोंजिग मुद्रण के बड़े अच्छे परिणाम ला रहा है। इसके द्वारा लोगों की जन्मकुण्डलियाँ ठीक-ठीक बनाई और वर-वधू की कुण्डलियाँ मिलाकर उन की विवाह योग्य समानता की जाँच-परख की जाने लगी है। घड़ियों तथा अन्य कोमल कल-पुर्जा वाले यंत्रों की मरम्मत का कार्य भी इनसे किया जाने लगा है। क्रेता को वस्तु की गुणवत्ता बताना और तत्काल वस्तुओं का ठीक बिल प्रदान कर सन्तुष्ट कर देने का काम भी इनसे लिया जा रहा है। वायुयानों की उड़ानों पर नियंत्रण आदि कौन-सा ऐसा कार्य है।  जो कम्प्यूटर की सहायता और सुविधापूर्ण ढंग से लाभदायक परिणाम के साथ संभव नहीं हो पा रहा है। इसके सहारे यानि इसके संचालन आदि की विधा का प्रशिक्षण पाकर आज हज़ारों शिक्षित बेरोजगार रोजगार पाने में भी सफल हो सके एवं हो रहे है।इस प्रकार आँकड़ों के खेल के माहिर इस कम्प्यूटर ने सचमुच मानव-मस्तिष्क होने का कथन सच्चा कर दिखाया है।
उपसंहार : कम्प्यूटर से गिनाए गए तथा अन्य कई प्रकार के चाहे कितने ही काम क्यों न प्राप्त हो रहे या हो सकते हों; आखिर है। , तो वह एक बेजान मशीन हीइस कारणं कई बार उसके आँकड़े मानव के मन-मस्तिष्क को चकरा कर रख देने, स्तब्ध-स्तम्भित कर देने वाली सीमा तक गलत भी हो जाया करते है।सात रुपये सत्तर हजार या सत्तर लाख भी हो सकते है।सो इसके बढ़ते प्रयोग या कार्य प्रणाली से बहुत खुश न होकर बहुत सावधान रहना भी आवश्यक है। उसकी कोई गलत सूचना या आकलन अर्थ का अनर्थ कर बहुत बड़ी मुसीबत भी खड़ी कर सकता है। पूर्ण सावधानी और कुशल संचालन ही बचाव का एकमात्र उपाय है।