मेरा प्रिय खेल हॉकी

प्रस्तावना : हॉकी आधुनिक युग का एक लोकप्रिय खेल है। देश-देश में हॉकी मैच देखने के लिए मैदान में सहस्रों स्त्री-पुरुषों की उपस्थिति इस कथन की साक्षी है। भारत को इस खेल में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हो चुकी है, जिसका श्रेय श्री ध्यानचन्द जी को है। भारतीय खिलाड़ियों ने विश्व के कोने-कोने में अपने देश का नाम उज्ज्वल किया है। विश्व के हॉकी खेल के इतिहास में कदाचित् ही किसी दूसरे देश ने इतना कौशल और कमाल दिखाया हो ।
हॉकी खेल का आरम्भ : यद्यपि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल बन चुका है तथापि इसे विशुद्ध भारतीय खेल की श्रेणी में नहीं गिना जा सकता है। कारण है इसका ईरान में जन्म लेना। आज से लगभग चार सहस्र वर्ष पूर्व यह खेल ईरान की धरा पर खेला गया। तत्पश्चात् सम्मान की खोज में इसे भटकना पड़ा। अन्त में भारत में इसे पूरा सम्मान मिला। भारतीय संरक्षण में यह खूब पनपी ही नहीं अपितु विश्व में भी यह लोकप्रिय हो गई।

भारत में हॉकी खेल का इतिहास : हमारे देश में हॉकी का इतिहास सौ वर्ष से कुछ ही कम है। आज धारणा है कि यह खेल ब्रिटेन से भारत में आया; पर वास्तव में ऐसा नहीं है। आधुनिक हॉकी का खेल भारत में प्रवेश से पूर्व देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता था। पंजाब के देहातों में बच्चों द्वारा खेले जाने वाला ‘सिद्दी-खुण्डी’ इसी का ही एक रूप है।
चूँकि यह खेल भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न ढंग से खेला जाता था, अत: इसके नियम -अधिनियम भी हरे स्थान के लिए भिन्न-भिन्न थे। एक समय था जबकि इस खेल के खिलाडियों में किसी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं था; किन्तु समय परिवर्तन के साथ-साथ खेल को नियमों में जकड़कर वैज्ञानिक खेल का रूप दे। दिया गया। उनमें से मुख्य नियम है कि एक टीम के ग्यारह खिलाड़ी। होंगे। दूसरे नियम के अन्तर्गत गोल के समक्ष अर्द्ध-गोलाकार ‘लक्ष्मण-रेखा’ सी खींची जाने लगी और गेंद को उसमें से ले जाकर चोट करके ही गोल किया जाने लगा। अन्य नियमों में गेंद को गोल। में पहुँचाने के लिए हिट मारी गई। एक नियम यह भी है कि किसी कोने से चोट के बाद गोल में पहुँचाने से पूर्व किसी भी एक पक्ष द्वारा गेंद को स्पर्श करना आवश्यक है।
हॉकी खेल के लाभ : इस प्रकार नियमों में आबद्ध यह खेल खिलाड़ियों की शारीरिक चुस्ती, मानसिक स्फूर्ति और उनके विकास की सीढ़ी बन गया। इस खेल में किसी प्रकार का कोई भय नहीं अपितु आनन्द की वृद्धि है। अन्य खेलों में यही एक खेल ऐसा है, जो आत्मानुसार और पारस्परिक रूप में कार्य करने की प्रेरणा आदि देता है।
 भारतीय हॉकी टीम और ओलिम्पिक खेल : भारत में यह खेल नियमित रूप से सर्वप्रथम कलकत्ता जैसी महानगरी में खेला गया। वहीं पर सबसे पहले भारतीय टीम का संगठन हुआ। तत्पश्चात् धीरे-धीरे यह खेल भारत के कोने-कोने में प्रचलित होता गया। सन् 1928 में भारतीय टीम प्रथम बार ओलिम्पिक खेलों में शामिल हुई। और विजय का सेहरा उस के सिर बँधा । इसका श्रेय भारतीय हॉकी जादूगर ध्यानचन्द जी को है। सन् 1932 के ओलिम्पिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने एक के विरुद्ध चौबीस गोलों से अमरीकी खिलाड़ियों को पराजित किया।  इसका श्रेय भी ध्यानचन्द जी को ही गया: क्योंकि वे ही उस समय भारतीय टीम के कप्तान थे। उसके बाद भी सन् 1960 और 1968 को छोड़ कर भारत की विजय होती रही । सन् 1972 में कांस्य पदक और 1980 में स्वर्ण पदक पाकर भारतीय खिलाड़ियों ने अपने देश का नाम फिर से ऊँचा कर दिया। था। इससे हॉकी में भारत का स्थान व सम्मान पहले जैसा हो गया।