समय का सदुपयोग


तुलसी दास जी की चौपाई है – “का वरषा जब कृषी सुखाने, समय चूकि पुनि का पछिताने।” यह चौपाई समय के महत्व को अक्षरशः प्रकट करती है। एक और कहावत है -“अब पछताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुगगई खेत”। ये दोनों ही उद्धरण समय के महत्व को प्रतिपादित करते हैं। इनका आशय है कि समय पर किए जाने वाला कार्य यदि उसी समय न किया गया तो केवल पछताना ही पड़ता है। समय के महत्व की यह हमें याद दिलाते हैं।
प्रायः आलस के कारण समय पर काम न करने से बहुत बड़ी हानियाँ हो जाती है। हमारा क्षण क्षण मूल्यवान है। यदि हम उसका सदुपयोग करेंगे तो अवसर हाथ आ जाएगा। अवसर खो देने से कुछ भी हाथ नहीं लगता। “गया वक्त फिर हाथ आता नहीं”। प्रत्येक कार्य के सम्पन्न होने का एक समय होता है। उस समय यदि हम आलस में बैठे रहें तो कार्य कभी पूरा नहीं होता।
एक विद्यार्थी का समय उसकी शिक्षा प्राप्ति के लिए निर्धारित होता है। यदि वह विद्यार्थी काल में विद्याभ्यास करना छोड़ दे, तो जीवन भर पछताता है। ऐसे बहुत से व्यक्ति हमें मिलते हैं, जो शिकायत करते हैं – “हमने उस समय पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया, इधर उधर समय नष्ट करते रहे। अब हाथ मलते रहना पड़ रहा है। जीवन नरक बन गया है।”
समय धन से भी मूल्यवान है। गया हुआ धन जाकर फिर आ सकता है। पर गया हुआ समय फिर लौट कर नहीं आता। समय के महत्व को समझने वाला व्यक्ति कभी समय नष्ट नहीं करता। उसका सिद्धान्त होता है:
कालि करें सो आज करआजक सो अब।।
पल में प्रलय होयगीफेरि करेगा कव।।

समय के संदर्भ में यह सिद्धान्त अत्यंत उपयोगी है।
प्रत्येक मनुष्य को समय का सदुपयोग करना चाहिए। एक विद्यार्थी के लिए तो इसका महत्व और भी अधिक है। समझदार विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग करने के लिए समय विभाग चक्र बनाकर रखते हैं। जो समय जिस काम या विषय के लिए निर्धारित करलेते हैं, उसी के अनुसार काम करते हैं। ऐसा करने से आलस की भावना नहीं आती। उनका क्षण-क्षण उपयोगी ढंग से व्यतीत होता है। वे जीवन में सफल होते हैं।
जीवन समय से ही बना है। समय का सदुपयोग ही जीवन का सदुपयोग है। हमें अपने हर एक क्षण का सही उपयोग करना चाहिए। यही समय का सदुपयोग है। आज का काम आज ही करलेना है, उसे कल के लिए छोड़ना आलस और समय का दुरुपयोग है। विद्यार्थियों के लिए समय का सदुपयोग अध्ययन ही है। इसके विपरीत गपशप मारना, सोते पड़े रहना, अधिक सिनेमा देखना समय का दुरुपयोग है।
ऐसे भी व्यक्ति समाज में मिल जाते हैं, जिनकी शिकायत होती है। – “क्या करें समय किसी प्रकार बीतता ही नहीं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन को व्यर्थ नष्ट करते हैं। यदि वे सदग्रंथों का अध्ययन ऐसे समय में करें तो उन्हें कितनी आत्मशांति और संतोष प्राप्त हो सकता है। पढ़ते समय मनोरंजन तो होगा ही।
समय को किसी भी समाजोपयोगी कार्य में व्यतीत करना समय का सदुपयोग होगा। हमारे देश के कई महान नेताओं ने समय का सदुपयोग किया है – बाल गंगाधर तिलक को जब अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया तो उस समय का उपयोग करके ‘गीता’ की व्याख्या कर समाज को एक निधि का समर्पण किया। नेहरू ने अपना अधिकांश साहित्य जेल के जीवन में रचा। जितते महापुरुष हुए हैं सभी समय का महत्व पहचानते थे।
आलस्य समय के सदुपयोग का सबसे बड़ा शत्रु है। आलसी व्यक्ति कुछ भी नहीं कर सकता वह “दैव दैव” पुकारता रहता है। अपने जीवन को नष्ट कर लेता है।
आज हमारा देश स्वतंत्र है। हमारे सामने अपने देश को ऊँचा उठाकर अपना भविष्य बनाने का अवसर है। यह काम समय के सदुपयोग से ही पूरा होगा। समय किसी के लिए ठहरता नहीं, वह वापस मुड़कर भी नहीं आता। अपने समय के अन्दर ही अपने काम पूरे कर लेने से समय का सदुपयोग भी होता है और इससे आंतरिक सुख भी प्राप्त होता है। समय का परोपकार में उपयोग देश हित में ही है तथा आत्मा को संतोष भी देता है।
आइए! आज से हम प्रण करें कि समय को कभी व्यर्थ न जाने देंगे। अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को किसी उपयोगी कार्य में ही लगाएंगे। इसी में देश और समाज का कल्याण है।