बाढ़ का दृश्य

प्रकृति के प्रकोप का एक स्वरूप बाढ़ है। सामान्य रूप से जो नदी शान्त रहती है, अपने किनारे बसे हुए ग्राम वासियों को नित्य अनेक प्रकार से सहायता करती है, बाढ़ के समय उसका रौद्र रूप देखकर भय लगता है। नदी के उद्गम क्षेत्र में भारी वर्षा होने पर नदी देखने को मिलता है। उफन कर चलने लगती है। उसके तटीय प्रदेश में प्रलयंकारी दृश्य नदी में बड़े वेग से पानी बढ़ता है। सबसे पहले नदी के किनारे के खेतों का सर्वनाश होता है। खड़ी फसल डूबकर सड़ जाती है।
तट के समीप बसे गाँवों में पानी भरने लगता है। ग्रामवासी सुरक्षित स्थान की खोज में घर छोड़कर जाने लगते हैं। कोई ऊँचे वृक्षों की शरण लेते हैं। बाढ़ का प्रकोप अधिक होने पर वहाँ भी वे सुरक्षित नहीं रहते। अनेक पशु और प्राणी उसकी चपेट में आकर बह जाते हैं। असावधान चरवाहे और अनेक चरते हुए पशु बाढ़ की चपेट में बहुधा अपने प्राण खो बैठते हैं।
नदी के तट पर बसे नगरों में बाढ़ का प्रकोप अलग ही दृश्य प्रस्तुत करता है। सड़कों और बाजारों में पानी भर जाता है। लोग सुरक्षित स्थान पर पहुँचने के लिए नावों का सहारा लेते हैं। जब तक बाढ़ का पानी बढ़ता रहता है तब तक लोगों के प्राण संकट में पड़े रहते हैं।
बाढ़ के भयंकर वेग से नदी किनारे के बड़े बड़े वृक्ष भी उखड़ कर पानी में बहने लगते हैं। ये वृक्ष कभी कभी बाढ़ की चपेट में आए प्राणियों को नाव का काम देते हैं। एक बार देखा गया कि कि बाढ़ से बहकर जाते हुए वृक्ष पर भयंकर सर्प और आदमी चिपटे हुए जा रहे हैं। इस संकट में वे अपनी शत्रुता भी भूल चुके हैं। सब को अपने प्राणों की चिन्ता है। बहते हुए पानी में पशुओं के शव, साँप, बिच्छू आदि विषैले जन्तु भी बहते दिखाई देते हैं।
साहसी लोग ऐसे समय में प्रभावित लोगों की सहायता करते हैं। तैराक लोग जितना संभव होता है, उतना लोगों का बचाव करते हैं। अधिक दिनों तक बाढ़ का प्रकोप रहा तो सरकारी मशीनरी भी सक्रिय हो जाती है। मोटर बोटों और नावों द्वारा टीलों आदि पर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाया जाता है। द्वीपाकार बने हुए स्थानों पर शरणार्थियों को सरकार भोजन पानी हैलीकोप्टरों द्वारा पहुँचाती है। हैलीकोप्टर लोगों को ऐसे स्थानों से उठाकर भी सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाते हैं।
बाढ़ के समय एक संकट है, तो बाढ़ उतरते ही दूसरा उपस्थित हो जाता है। गड्ढ़ों में भरा पानी सड़ जाता है। इससे वाय प्रदूषण व्याप्त हो जाता है। प्रदूषण के कारण अनेक बीमारियाँ फैल है। सरकार को चिकित्सा का प्रबन्ध करना होता है। प्रभावित थे। के निवासियों को रोग निरोधक टीके लगाए जाते हैं।
जो लोग बेघर हो जाते हैं, उनके पास खाना और कपड़ों की समस्या हो जाती है। सरकार को इसका भी प्रबन्ध करना पड़ता है। कुछ सहायता राशि सरकार स्वयं स्वीकृत करती है, तथा कल सहायता समाज सेवी संस्थाएँ करती है। वे घर घर जाकर अनाज व पुराने कपड़े इकड़े करके प्रभावित लोगों में बाँटते हैं।
बाढ़ के समय जो करोड़ों रुपए की फसल नष्ट हो जाती है, उसमें । तो सरकार प्रभावित किसानों की सहायता करती है। पर बाढ़ स्वयं में ही उनकी गुप्त रूप से सहायता करती है। बाढ़ उपजाऊ मिट्टी से खेतों । को भरदेती है, जो बहुमूल्य खाद का काम देती है। दूसरी फसल में उनकी फसल चौगुनी उतरती है।