कम्प्यूटर


विज्ञान के नित्य नवीन बढ़ते चरणों ने मानव को एक अपूर्व शक्ति कम्प्यूटर के रूप में प्रदान की है। विज्ञान की नित्य नई उन्नति ने मानव के शरीर के भिन्न भिन्न अंगों को आराम पहुँचाया है, तो कम्प्यूटर के आविष्कार से उसके मस्तिष्क को आराम मिला है। कम्प्यूटर का शब्दार्थ संगणक है। कम्प्यूटर केवल गणना ही नहीं और भी अनेक ऐसे कार्य करता है जिनमें मस्तिष्क के उपयोग की आवश्यकता होती
कम्प्यूटरों द्वारा सभी प्रकार की गणना सुलभ हो गई है। हम बरे से बड़े आंकड़ों की गणित सम्बन्धी प्रक्रियाएँ कम्प्यूटर से मिनटों में कर सकते हैं। जटिल समस्याएँ बिना मस्तिष्क के प्रयोग के हल हो जाती हैं। कम्प्यूटर से मौसम की जानकारी हो जाती है। कम्प्यूटर अनेक प्रकार की सूचनाएँ इकट्ठी करके उनका आवश्यकता के समय संचरण करते हैं। रोगियों के रोग का निदान करते हैं। तथा ऐसे ही अनेक कार्यों की कम्प्यूटरों द्वारा किया जाता है, जो सामान्य तौर पर श्रमसाध्य, व्ययसाध्य तथा समयसाध्य होते हैं।
सामान्य जनता कम्प्यूटर को “विशाल मस्तिष्क’ की संज्ञा देती है। संसार की दृष्टि में मस्तिष्क भी एक कम्प्यूटर है। मस्तिष्क में अधिक से अधिक सूचनाएँ संग्रहित रहती हैं। हम आवश्यकतानुसार उनका उपयोग करते रहते हैं। कम्प्यूटर भी यही कार्य सम्पन्न करके हमारे मस्तिष्क को आराम देता है।
इस प्रकार से विकसित कम्प्यूटरों का प्रयोग आज व्यक्तिगत, घरेलू कार्य, कार्यालयों तथा कारखानों में किया जा रहा है। संगणक के रूप में कम्प्यूटर तो आज छोटे से छोटे व्यापारी के पास भी मिल जाता है। यह उनके प्रतिदिन के हिसाब किताब में सहायक होता है। बड़े बड़े बाकी, जोड़, भाग, गुणा, वर्गमूल, प्रतिशत आदि देखते देखते ही हल हो जा रहे हैं।
अब कम्प्यूटरों में दो यांत्रिक हाथ जोड़ दिए गए हैं। इनसे कम्प्यूटर का मानवी करण हो गया है। ये यंत्र, उद्योगों में वे सब काम करते हैं, जो अब तक मानव किया करता था। अस्पतालों में वे रोगियों की देखभाल उसी प्रकार करते हैं जैसे नर्से किया करती हैं। वे रोगियों का तापमान ले सकते हैं, रोगियों की शैय्या की सफाई करते हैं। रोगी की दिन भर की दशा परिवर्तन का चार्ट भी तैयार कर लेते हैं। कार्यालयों दूकानों, खेतों में भी उनसे काम लिया जाता है।
मुद्रणालयों में कम्पोजिंग का काम कम्प्यूटरों से लिया जाने लगा है। इसके प्रयोग से मुद्रण में स्वच्छता एवं शोभा बढ़ती है। बैंकों में हिसाब किताब रखने में इनसे सुगमता हो गई है। रेलवे के कार्यों में कम्प्यूटर का प्रयोग होने से टिकट के आरक्षण में सुविधा हो गई हैं। कम्प्यूटर शायिकाओं की स्थिति का तुरंत पता दे देता है। अब किसी भी ऐसे स्टेशन का टिकट भी आप अपने स्टेशन पर ही खरीद कर आरक्षण करा सकते हैं, जहाँ कम्प्यूटर लगा हो। और तो और शादियों के लिए जोड़े मिलाने का काम भी कम्प्यूटरों से लिया जाने लगा है।
भारत में आज तेज गति से कम्प्यूटरीकरण का काम चल रहा है। पर कम्प्यूटर की शिक्षा में इतनी प्रगति नहीं हो रही। अभी केवल बड़े बड़े नगरों की शिक्षण संस्थाओं में ही इसकी व्यवस्था है। वह भी प्रारम्भिक दशा की। कम्प्यूटर की विधिवत शिक्षा के लिए वातानुकूलित कक्ष एवं प्रशिक्षित अध्यापकों की आवश्यकता है। यह बहुत व्यय साध्य है। देश में इस स्थिति को सुधारने में पर्याप्त समय लग सकता है। फिर भी वह समय दूर नहीं जब हमारे देश में कम्प्यूटरों की एक प्रकार से बाढ़ सी आ जाएगी।
अपने इस नए उत्साह और धुन में हम यह भूल गए हैं कि अन्ततोगत्वा कम्प्यूटर का प्रभाव काम करने वाले हमारे जन साधारण पर पड़ेगा। केवल कुछ प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को छोड़कर इस खिलौने का उपयोग अकुशलों के लिए कुछ भी नहीं होगा। बेरोजगारी के इस युग में बेरोजगारों की संख्या और भी बढ़ेगी। एक कम्प्यूटर के प्रयोग से कम से कम बीस मजदूर या कर्मचारी बेकार हो जाएंगे। भारत के लिए यह समस्या सिर दर्द होगी। बड़े बड़े कारखानों के लगजाने से एक बार बेरोजगारी बढ़ी थी। अब कम्प्यूटरों के कारण इसमें और भी वृद्धि होगी।
यह स्थिति लगातार कई वर्षों तक न बनी रहे, इसके लिए हमें निरोधक उपाय करने होंगे। कम्प्यूटर का उपयोग वहीं किया जाय जहाँ मानव मस्तिष्क जटिल समस्याओं से जूझने से कठिनाई का अनुभव देश के हित में नहीं है। करता हो। अन्धा धुंध कम्प्यूटर का उपयोग नहीं होना चाहिए। यह ऐसा भी नहीं कि कम्प्यूटर से भूलें नहीं होती। कम्प्यूटरों से काम लेने वाला तो मानव ही है। मानव की छोटी सी भूल कम्प्यूटर से बड़ी भूल का कारण बन जाती है। कुछ वर्ष पूर्व हाई स्कूल की परीक्षा का परिणाम कम्प्यूटर से निकाला गया था। एक स्थान पर उसमें थोड़ी सी चूक हो जाने से बोर्ड का सम्पूर्ण परीक्षा फल गलत हो गया। एक छात्र के अंक दूसरे को पड़ गए। परीक्षा फल फिर से निकालना पड़ा।
इसीलिए हमें सावधान रहना होगा कि कम्प्यूटर का प्रयोग बिना सोचे समझे न किया जाए। यदि हमें एक सुदृढ़ और शक्तिशाली राष्ट्र बनाना है तो मानवीय पहलू के सभी कोणों का ध्यान रखना होगा।