बिशन सिंह बेदी

बिशन सिंह बेदी का नाम विश्व के श्रेष्ठतम स्पिन गेंदबाजों में लिया जाता है। वह अपने समय में अत्यन्त लोकप्रिय खिलाड़ी रहे। बेदी को 1969 में भारत सरकार की ओर से अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया तथा 1970 में ‘पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेदी ने 1968-69 में पंजाब के विरुद्ध हैट्रिक लगाई थी।
बिशन सिंह बेदी अपने समय के सर्वश्रेष्ठ बायें हाथ के स्पिनरों में से एक रहे। वह दर्शकों तथा विदेशी टीमों में समान रूप से लोकप्रिय रहे।
बिशन सिंह बेदी ने अमृतसर के दो प्रसिद्ध कॉलेजों-खालसा कॉलेज तथा हिन्दू कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता ज्ञान सिंह ने उन्हें खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी कोचिंग प्रोफेसर ज्ञान प्रकाश द्वारा हुई तथा कॉलेज के कैप्टन गुरपाल सिंह ने उनको खेल के प्रति पूरा सहयोग और समर्थन दिया। अतः वह अपने स्कूल व कॉलेज दोनों में अत्यन्त सफल खिलाड़ी रहे। बाद में उन्होंने रेलवे और पंजाब के लिए भी खेला। बेदी ने 1965 में नार्थ जोन अन्तरविश्वविद्यालय फाइनल में मेरठ में दिल्ली के विरुद्ध खेल में अत्यन्त बेहतरीन प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा।
बिशन सिंह भारतीय क्रिकेट में प्रसिद्ध चौकड़ी के चार लोगों में से एक थे। उनके अतिरिक्त प्रसन्ना, वेंकट तथा चन्द्रशेखर इस चौकड़ी में शामिल थे। बिशन सिंह उन खिलाड़ियों से इस मामले में थोड़ा अलग थे कि वह हर बार भारतीय टीम में जरूर शामिल किए जाते थे, जबकि अन्य तीनों को एक या दो मैच में टीम से बाहर भी रहना पड़ता था।